बचपन की यादें  

     

” घंटी जो बजती स्कूल की ,
यादें आ जाती बचपन की ||
वो माँ का दिया खाना ,
हमेशा भागते हुए जाना ||
हिन्दी टीचर से बतियाना ,
गणित वाली से छुप जाना ||
वार्षिक उत्सव की धूमधाम ,
गर्मियों की छुट्टी की घमासान ||
ये सब आता है ,सपनों में ,
आज भी है , सब यादों में ||
मन करता है , फिर स्कूल चले
उन्ही गलियों में , जिन्हे भूल चले ||
पर बस है , ये मन का अरमान ,
पता है , नहीं है ये आसान ||
फिर भी , घंटी जो बजती स्कूल की ,
यादें आ जाती बचपन की || ”                     

रीता यादव 
हिन्दी अध्यापिका   
एक्या स्कूल बी . टी . एम      
                            

Posted by Ekya

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